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जीवन की उत्कृष्टता

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दिव्य विचारों से उत्कृष्ट जीवन........ समस्त शुभ और अशुभ, सुख और दुःख की परिस्थितियों के हेतु तथा उत्थान पतन के मुख्य कारण- विचारों को वश में रखना मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य है। विचारों को उन्नत कीजिये, उनको मंगल मूलक बनाइये, उनका परिष्कार एवं परिमार्जन कीजिये और वे आपको स्वर्ग की सुखद परिस्थितियों में पहुँचा देंगे। इसके विपरीत यदि आपने विचारों को स्वतन्त्र छोड़ दिया उन्हें कलुषित एवं कलंकित होने दिया तो आपको हर समय नरक की ज्वाला में जलने के लिये तैयार रहना चाहिये। विचारों की चपेट से आपको संसार की कोई शक्ति नहीं बचा सकती। विचारों का तेज ही आपको ओजस्वी बनाता है और जीवन संग्राम में एक कुशल योद्धा की भाँति विजय भी दिलाता है। इसके विपरीत आपके मुर्दा विचार आपको जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पराजित करके जीवित मृत्यु के अभिशाप के हवाले कर देंगे। जिसके विचार प्रबुद्ध हैं उसकी आत्मा प्रबुद्ध है और जिसकी आत्मा प्रबुद्ध है उससे परमात्मा दूर नहीं । 🙏🌷💐🙏

अफगानिस्तान का हाल

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 तालिबान 90 हजार पुराने हथियार,  अफगान सेना 3 लाख आधुनिक हथियार।  उनकी 3 लाख की सेना कहां गायब हो गई।  इसके बावजूद एक माह में तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया ...कैसे ?? जब 2002 में अमेरिका ने अफगानिस्तान से तालिबानी सरकार  को उखाड़ कर नई सरकार स्थापित की थी तब सारे तालिबानी कहां गायब हो गए थे।  वे गायब नही हुए थे उन्होंने अपनी इस्लामिक सोच का पूरा फायदा उठाया था। सिर्फ उनके कुछ टॉप लीडर्स गायब हुए बाकी वही तालिबानी अधिकतर संख्या में अफगानिस्तान की नई सेना में भर्ती होते गए और अमेरिका को मूर्ख बनाते रहे। माल भी खाते रहे मजे भी लेते रहे और नाम से सिर्फ अमेरिकी सरकार के अधीन रहे असल में थे वे तालिबान ही।    ट्रंप यह सब कुछ समझ चुके थे ,मोदीजी भी यह सब समझते थे। इसीलिए ट्रंप ने अफगानिस्तान छोड़ने की योजना बना ली थी ...क्योंकि अमेरिका बेकार में धन बरबाद कर रहा था। इसीलिए मोदीजी ने भी समझदारी से काम लेकर भारत का कोई सैनिक दखल अंदाजी का रिस्क नहीं किया।    क्योंकि ...इस्लाम कुछ सिखाए या ना सिखाए यह जरूर सिखाता है की चालें कैसे खेली...

पितृ देवो भवः

 पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः।  पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवताः॥  पितरौ यस्य तृप्यन्ति सेवया च गुणेन च।  तस्य भागीरथीस्नानमहन्यहनि वर्तते॥  सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पिता।  मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्॥  मातरं पितरंश्चैव यस्तु कुर्यात् प्रदक्षिणम्।  प्रदक्षिणीकृता तेन सप्तदीपा वसुन्धरा॥  पद्मपुराण में कहा गया है कि पिता धर्म है, पिता स्वर्ग है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तप है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सम्पूर्ण देवता प्रसन्न हो जाते हैं। जिसकी सेवा और सदगुणों से पिता-माता संतुष्ट रहते हैं, उस पुत्र को प्रतिदिन गंगा-स्नान का पुण्य मिलता है। माता सर्वतीर्थमयी है और पिता सम्पूर्ण देवताओं का स्वरूप है। इसलिये सब प्रकार से माता-पिता का पूजन करना चाहिये। माता-पिता की परिक्रमा करने से पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है। [कल्याण, सेवा अंक]

।।जयश्रीसीताराम।। आञ्जनेयमतिपाटलाननं । काञ्चनाद्रिकमनीयविग्रहम् ।। पारिजाततरुमूलवासिनं। भावयामिपवमाननन्दनम् ॥ ज्येष्ठ मास के प्रथम मंगलवार पर श्री हनुमान जी महाराज के पावन चरणों में कोटिशः वन्दन समर्पित करते हुए। आप सभी को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएँ । श्री हनुमान जी की कृपा हम सभी पर निरंतर बनी रहे । 🙏जयश्रीराम🙏

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यूपी में 2 दिन का लॉकडाउन बढ़ा गुरुवार सुबह 7:00 बजे तक लागू रहेगा लॉक डाउन

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